एक समय था जब मैंने दुनिया को अलविदा कहने का विचार कर लिया था ! - There was a time when I thought of saying goodbye to the world!
एक समय था जब मैंने दुनिया को अलविदा कहने का विचार कर लिया था| क्योंकि मेरे ठीक होने की उम्मीद ना के बराबर थी लेकिन आयुर्वेदिक किडनी ट्रीटमेंट लेने से मानों किसी ने जिंदा लाश में जान डाल दी हो|
मेरा नाम ज़ुबैर मलिक है| मैं बिजनौर, उत्तरप्रदेश का रहने वाला हूँ| मैं कंप्यूटर हार्डवेयर और मोबाइल रिपेयर का काम करता हूँ| मेरा काम ही कुछ ऐसा है कि कब पूरा दिन निकल जाता हैं कुछ पता ही नहीं चलता| सारा दिन बस दुकान पर ही बैठा रहता हूँ| मेरे घर से मेरी दुकान भी ज्यादा दूर नहीं है इसलिए ज्यादा चलना-फिरना भी नहीं हो पता है| एक दिन मैं दुकान पर बैठा था कि मेरे पेट में दर्द होने लगा और मेरा पूरा शरीर पसीने से भीग गया| कुछ देर के बाद मैं पेशाब करने गया तो देखा पेशाब का रंग हल्का लाल सा था मुझें लगा शायद गर्मी के कारण ऐसा हो रहा हो| फिर जब मैं घर पहुंचा मैंने अपने छोटे भाई को बताया उसने कहा, ‘अगर ज्यादा तबीयत खराब हैं तो डॉ. को क्यों नहीं दिखा लेते !
मैंने सोचा, अब इतनी छोटी-सी बात के लिए डॉ. से क्या पूछना ! कुछ दिनों तक तो मेरी तबीयत ठीक रही| लेकिन कुछ दिनों के बाद मुझें घबराहट और पेशाब करने में जलन सी महसूस होने लगी| मेरे घर के पास ही एक प्राइवेट हॉस्पिटल है वहाँ गया तो मैंने डॉ. साहब को सब कुछ बताया उन्होने पहले मुझे ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट करने की सलाह दी रिपोर्ट आने पर डॉ. ने मुझे बताया कि तुम्हारा तो यूरिन से प्रोटीन बहुत आ रहा हैं उन्होने मुझे कुछ दिन दवाई खाने की सलाह दी और लखनऊ हॉस्पिटल में देखने को कहा| मेरी तबीयत तो दिन-ब-दिन खराब हो रही थी मैं तो अब चल भी नहीं पा रहा था और ऐसा लग रहा था कि जैसे शरीर में जान ही नहीं बची हो| मेरे तो हाथ-पैर बिल्कुल भी काम नहीं कर रहे थे और सोते समय एक तरफ से दूसरी तरफ पलट भी नहीं पा रहा था कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर अचानक ये सब क्या हो रहा है मेरे साथ !
लखनऊ हॉस्पिटल के डॉक्टर ने मेरी रिपोर्ट देखकर बोला कि आपकी तो हालत बहुत नाजुक हैं| मुझें 1 महीने की दवाई खाने की सलाह दी लेकिन मेरा उन दवाइयों से भी कोई खास फर्क नहीं पड़ा| मेरी तबीयत पहले से भी ज्यादा खराब हो चुकी थी मैं अपना खाना भी नहीं खा पा रहा था मेरी माँ और मेरी बहन मुझे खाना खिलाते थे क्योंकि मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे मेरे हाथों मे जान ही न हो| फिर हम डॉ. के पास गए तो उन्होने कहा आपको तो दवाई भी सूट नहीं हो रही अब आपको इंजेक्शन लगाना होगा जिसकी कीमत लगभग 2 लाख है| मेरे घर वालों ने मुझे समझाया कि जैसे डॉक्टर साहब बोल रहे हैं वैसे ही करों हम तुम्हारे साथ हैं| तुम बस अपना इलाज करवाओ खर्चे की चिंता मत करों लेकिन मेरा दिल नहीं मना क्योंकि मैंने सोचा कहीं इतने पैसे लगाने के बाद भी मैं ठीक नहीं हुआ तो क्या होगा? मैं अपने आप को इस हालत में देख कर अल्लाह से प्रार्थना कर रहा था कि मुझें मौत क्यों ही दे देता क्योंकि मेरी वजह से मेरी माँ, बहन और भाई सभी लोग बहुत परेशान हो गए थे|
फिर एक दिन मेरे पड़ोसी ने हमे समझाया कि आप आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट क्यों नहीं करवा लेते और उन्होने हमें कर्मा आयुर्वेदा के किडनी ट्रीटमेंट हॉस्पिटल के बारे में बताया| फिर हमने कर्मा आयुर्वेदा के आयुर्वेदिक किडनी ट्रीटमेंट यूट्यूब चैनल पर किडनी रोग और यूरिन से प्रोटीन आने जैसे समस्या से ठीक हुए किडनी रोगियों की विडियो देखी| फिर हमने सोचा चलो कोई नहीं आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट भी करावा कर देख लेते हैं| हम दिल्ली के कर्मा आयुर्वेदा हॉस्पिटल गए और डॉ. पुनीत से मिलें उन्होने मेरी सारी रिपोर्ट देखी और बताया की पेशाब से प्रोटीन आने से किडनी में इन्फेक्शन काफी increase ho गया है| लेकिन घबराने वाली कोई बात नहीं आपको रेगुलर आयुर्वेदिक दवा खानी होगी|
मुझें डॉ. पुनीत ने 1 महीने तक दवा लेने की सलाह दी| जैसे डॉ. साहब ने मुझें समझाया था मैं वैसे ही टाइम पर दवा ले रहा था और मुझें 10 दिनों में ही आयुर्वेदिक दवा का असर दिखने लगा मेरे शरीर में जो सूजन थी वो भी कम हो गयी और मुझें पहले से बहुत अच्छा लगने लगा| पहले तो मै चल भी नहीं पा रहा था लेकिन 1 महिना रेगुलर आयुर्वेदिक दवा लेने से मैं आराम से चल-फिर पा रहा हूँ| अब मेरे यूरिन में प्रोटीन भी नेगेटिव आ रहा हैं और मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूँ| इसके लिए मैं कर्मा आयुर्वेदा और डॉ. पुनीत का धन्यवाद करता हूँ !
Ayurvedic kidney specialist in India
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